श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.66

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सूत उवाच

एवं नगाहश्रवणोरुधर्मे प्रकाश्यमाने ऋषिभिः सभायाम्।

आश्‍चर्यमेकं समभूत्तदानीं तदुच्यते संशृणु शौनक त्वम्॥ ६६

evaṃ nagāhaśravaṇorudharme prakāśyamāne ṛṣibhiḥ sabhāyām|

āścaryamekaṃ samabhūttadānīṃ taducyate saṃśṛṇu śaunaka tvam|| 66

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकजी! जिस समय सनकादि मुनीश्‍वर इस प्रकार सप्ताहश्रवणकी महिमाका बखान कर रहे थे, उस सभामें एक बड़ा आश्‍चर्य हुआ; उसे मैं तुम्हें बतलाता हूँ, सुनो॥ ६६॥

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