श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.56

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

आगतोऽयं कलिर्घोरो भविष्यन्ति पुनः खलाः।

तत्सङ्गेनैव सन्तोऽपि गमिष्यन्त्युग्रतां यदा॥ ५६

āgato'yaṃ kalirghoro bhaviṣyanti punaḥ khalāḥ|

tatsaṅgenaiva santo'pi gamiṣyantyugratāṃ yadā|| 56

अर्थ

अब घोर कलिकाल आया ही समझिये, इसलिये संसारमें फिर अनेकों दुष्ट प्रकट हो जायँगे; उनके संसर्गसे जब अनेकों सत्पुरुष भी उग्र प्रकृतिके हो जायँगे, तब उनके भारसे दबकर यह गोरूपिणी पृथ्वी किसकी शरणमें जायगी? कमलनयन! मुझे तो आपको छोड़कर इसकी रक्षा करनेवाला कोई दूसरा नहीं दिखायी देता॥ ५६-५७॥✎ 12

यह अर्थ श्लोक 56–57 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #12 शब्दोंके बीचका स्थान: ५५॥अब → ५५॥ अब

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