श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.54

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सूत उवाच

यदा कृष्णो धरां त्यक्‍त्वा स्वपदं गन्तुमुद्यतः।

एकादशं परिश्रुत्याप्युद्धवो वाक्यमब्रवीत्॥ ५४

yadā kṛṣṇo dharāṃ tyaktvā svapadaṃ gantumudyataḥ|

ekādaśaṃ pariśrutyāpyuddhavo vākyamabravīt|| 54

अर्थ

सूतजीने कहा—शौनकजी! जब भगवान् श्रीकृष्ण इस धराधामको छोड़कर अपने नित्यधामको जाने लगे, तब उनके मुखारविन्दसे एकादश स्कन्धका ज्ञानोपदेश सुनकर भी उद्धवजीने पूछा॥ ५४॥

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