श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.41

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

हेमसिंहयुतं चैतद्वैष्णवाय ददाति च।

कृष्णेन सह सायुज्यं स पुमाँल्लभते ध्रुवम्॥ ४१

hemasiṃhayutaṃ caitadvaiṣṇavāya dadāti ca|

kṛṣṇena saha sāyujyaṃ sa pumām̐llabhate dhruvam|| 41

अर्थ

जो पुरुष इसे सोनेके सिंहासनपर रखकर विष्णुभक्तको दान करता है, वह अवश्य ही भगवान्‌का सायुज्य प्राप्त करता है॥ ४१॥

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