जो पुरुष अहर्निश अर्थसहित श्रीमद्भागवतशास्त्रका पाठ करता है, उसके करोड़ों जन्मोंका पाप नष्ट हो जाता है—इसमें तनिक भी संदेह नहीं है॥ ३७॥
यश्च भागवतं शास्त्रं वाचयेदर्थतोऽनिशम्।
जन्मकोटिकृतं पापं नश्यते नात्र संशयः॥ ३७
जो पुरुष अहर्निश अर्थसहित श्रीमद्भागवतशास्त्रका पाठ करता है, उसके करोड़ों जन्मोंका पाप नष्ट हो जाता है—इसमें तनिक भी संदेह नहीं है॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 50) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/37/