श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.26

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ग्रन्थोऽष्टादशसाहस्रो द्वादशस्कन्धसम्मितः।

परीक्षिच्छुकसंवादः शृणु भागवतं च तत्॥ २६

grantho'ṣṭādaśasāhasro dvādaśaskandhasammitaḥ|

parīkṣicchukasaṃvādaḥ śṛṇu bhāgavataṃ ca tat|| 26

अर्थ

इस ग्रन्थमें अठारह हजार श्लोक और बारह स्कन्ध हैं तथा श्रीशुकदेव और राजा परीक्षित‍्का संवाद है। आप यह भागवतशास्त्र ध्यान देकर सुनिये॥ २६॥✎ 1567

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1567 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शुकशास्त्र-की → शुकशास्त्रकी

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