श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.22

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

विमानानि समारुह्य कियन्तो देवनायकाः।

कल्पवृक्षप्रसूनैस्तान् सर्वांस्तत्र समाकिरन्॥ २२

vimānāni samāruhya kiyanto devanāyakāḥ|

kalpavṛkṣaprasūnaistān sarvāṃstatra samākiran|| 22

अर्थ

कोई-कोई देवश्रेष्ठ तो विमानोंपर चढ़कर वहाँ बैठे हुए सब लोगोंपर कल्पवृक्षके पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ २२॥

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