॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.3.20
एकभागे ऋषिगणास्तदन्यत्र दिवौकसः।
वेदोपनिषदोऽन्यत्र तीर्थान्यत्र स्त्रियोऽन्यतः॥ २०
ekabhāge ṛṣigaṇāstadanyatra divaukasaḥ|
vedopaniṣado'nyatra tīrthānyatra striyo'nyataḥ|| 20
अर्थ
एक ओर ऋषिगण, एक ओर देवता, एक ओर वेद और उपनिषदादि तथा एक ओर तीर्थ बैठे, और दूसरी ओर स्त्रियाँ बैठीं॥ २०॥