श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.2

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

कुत्र कार्यो मया यज्ञः स्थलं तद्वाच्यतामिह।

महिमा शुकशास्त्रस्य वक्तव्यो वेदपारगैः॥ २

kutra kāryo mayā yajñaḥ sthalaṃ tadvācyatāmiha|

mahimā śukaśāstrasya vaktavyo vedapāragaiḥ|| 2

अर्थ

यह यज्ञ मुझे कहाँ करना चाहिये, आप इसके लिये कोई स्थान बता दीजिये। आपलोग वेदके पारगामी हैं, इसलिये मुझे इस शुकशास्त्रकी महिमा सुनाइये॥ २॥

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