॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.3.2
कुत्र कार्यो मया यज्ञः स्थलं तद्वाच्यतामिह।
महिमा शुकशास्त्रस्य वक्तव्यो वेदपारगैः॥ २
kutra kāryo mayā yajñaḥ sthalaṃ tadvācyatāmiha|
mahimā śukaśāstrasya vaktavyo vedapāragaiḥ|| 2
अर्थ
यह यज्ञ मुझे कहाँ करना चाहिये, आप इसके लिये कोई स्थान बता दीजिये। आपलोग वेदके पारगामी हैं, इसलिये मुझे इस शुकशास्त्रकी महिमा सुनाइये॥ २॥