श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.18

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

दीक्षिता नारदेनाथ दत्तमासनमुत्तमम्।

कुमारा वन्दिताः सर्वैर्निषेदुः कृष्णतत्पराः॥ १८

dīkṣitā nāradenātha dattamāsanamuttamam|

kumārā vanditāḥ sarvairniṣeduḥ kṛṣṇatatparāḥ|| 18

अर्थ

तब कथा सुनानेके लिये दीक्षित होकर श्रीकृष्णपरायण सनकादि नारदजीके दिये हुए श्रेष्ठ आसनपर विराजमान हुए। उस समय सभी श्रोताओंने उनकी वन्दना की॥ १८॥ श्रोताओंमें वैष्णव, विरक्त, संन्यासी और ब्रह्मचारी लोग आगे बैठे और उन सबके आगे नारदजी विराजमान हुए॥ १९॥

यह व्याख्या श्लोक PRE.3.18 से PRE.3.19 तककी एक साथ है।

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