श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.66

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

छिन्दन्तु संशयं ह्येनं भवन्तोऽमोघदर्शनाः।

विलम्बो नात्र कर्तव्यः शरणागतवत्सलाः॥ ६६

chindantu saṃśayaṃ hyenaṃ bhavanto'moghadarśanāḥ|

vilambo nātra kartavyaḥ śaraṇāgatavatsalāḥ|| 66

अर्थ

आपलोग शरणागतवत्सल हैं तथा आपका दर्शन कभी व्यर्थ नहीं होता; इसलिये मेरा यह संदेह दूर कर दीजिये, इस कार्यमें विलम्ब न कीजिये॥ ६६॥

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