आपलोग शरणागतवत्सल हैं तथा आपका दर्शन कभी व्यर्थ नहीं होता; इसलिये मेरा यह संदेह दूर कर दीजिये, इस कार्यमें विलम्ब न कीजिये॥ ६६॥
छिन्दन्तु संशयं ह्येनं भवन्तोऽमोघदर्शनाः।
विलम्बो नात्र कर्तव्यः शरणागतवत्सलाः॥ ६६
आपलोग शरणागतवत्सल हैं तथा आपका दर्शन कभी व्यर्थ नहीं होता; इसलिये मेरा यह संदेह दूर कर दीजिये, इस कार्यमें विलम्ब न कीजिये॥ ६६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.66 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 46) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/66/