श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.51

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अशरीरगिरोक्तं यत्तत्किं साधनमुच्यताम्।

अनुष्ठेयं कथं तावत्प्रब्रुवन्तु सविस्तरम्॥ ५१

aśarīragiroktaṃ yattatkiṃ sādhanamucyatām|

anuṣṭheyaṃ kathaṃ tāvatprabruvantu savistaram|| 51

अर्थ

बताइये—आकाशवाणीने जिसके विषयमें कहा है, वह कौन-सा साधन है, और मुझे किस प्रकार उसका अनुष्ठान करना चाहिये। आप इसका विस्तारसे वर्णन कीजिये॥ ५१॥

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