॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.2.51
अशरीरगिरोक्तं यत्तत्किं साधनमुच्यताम्।
अनुष्ठेयं कथं तावत्प्रब्रुवन्तु सविस्तरम्॥ ५१
aśarīragiroktaṃ yattatkiṃ sādhanamucyatām|
anuṣṭheyaṃ kathaṃ tāvatprabruvantu savistaram|| 51
अर्थ
बताइये—आकाशवाणीने जिसके विषयमें कहा है, वह कौन-सा साधन है, और मुझे किस प्रकार उसका अनुष्ठान करना चाहिये। आप इसका विस्तारसे वर्णन कीजिये॥ ५१॥