tvaṃ tu bhaktiḥ priyā tasya satataṃ prāṇato'dhikā|
tvayā''hūtastu bhagavān yāti nīcagṛheṣvapi|| 3
अर्थ
फिर तुम तो भक्ति हो और सदा उन्हें प्राणोंसे भी प्यारी हो; तुम्हारे बुलानेपर तो भगवान् नीचोंके घरोंमें भी चले जाते हैं॥ ३॥✎ 910
त्वं तु भक्तिः प्रिया तस्य सततं प्राणतोऽधिका।
त्वयाऽऽहूतस्तु भगवान् याति नीचगृहेष्वपि॥ ३
फिर तुम तो भक्ति हो और सदा उन्हें प्राणोंसे भी प्यारी हो; तुम्हारे बुलानेपर तो भगवान् नीचोंके घरोंमें भी चले जाते हैं॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 40) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)