जो लोग भक्तिसे द्रोह करते हैं वे तीनों लोकोंमें दुःख-ही-दुःख पाते हैं। पूर्वकालमें भक्तका तिरस्कार करनेवाले दुर्वासा ऋषिको बड़ा कष्ट उठाना पड़ा था॥ २०॥
भक्तिद्रोहकरा ये च ते सीदन्ति जगत्त्रये।
दुर्वासा दुःखमापन्नः पुरा भक्तविनिन्दकः॥ २०
जो लोग भक्तिसे द्रोह करते हैं वे तीनों लोकोंमें दुःख-ही-दुःख पाते हैं। पूर्वकालमें भक्तका तिरस्कार करनेवाले दुर्वासा ऋषिको बड़ा कष्ट उठाना पड़ा था॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 42) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/20/