श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.20

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

भक्तिद्रोहकरा ये च ते सीदन्ति जगत्त्रये।

दुर्वासा दुःखमापन्‍नः पुरा भक्तविनिन्दकः॥ २०

bhaktidrohakarā ye ca te sīdanti jagattraye|

durvāsā duḥkhamāpannaḥ purā bhaktavinindakaḥ|| 20

अर्थ

जो लोग भक्तिसे द्रोह करते हैं वे तीनों लोकोंमें दुःख-ही-दुःख पाते हैं। पूर्वकालमें भक्तका तिरस्कार करनेवाले दुर्वासा ऋषिको बड़ा कष्ट उठाना पड़ा था॥ २०॥

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