श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.16

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

येषां चित्ते वसेद्भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी।

न ते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः॥ १६

yeṣāṃ citte vasedbhaktiḥ sarvadā premarūpiṇī|

na te paśyanti kīnāśaṃ svapne'pyamalamūrtayaḥ|| 16

अर्थ

जिनके हृदयमें निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्तःकरण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते॥ १६॥

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