सम्प्रदायानुसार प्राप्त हुई वैष्णवता भी कहीं देखनेमें नहीं आती। इस प्रकार जगह-जगह सभी वस्तुओंका सार लुप्त हो गया है॥ ७६॥
न हि वैष्णवता कुत्र सम्प्रदायपुरःसरा।
एवं प्रलयतां प्राप्तो वस्तुसारः स्थले स्थले॥ ७६
सम्प्रदायानुसार प्राप्त हुई वैष्णवता भी कहीं देखनेमें नहीं आती। इस प्रकार जगह-जगह सभी वस्तुओंका सार लुप्त हो गया है॥ ७६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.76 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 39) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/76/