इस घोर कलिकालमें जीव प्रायः आसुरी स्वभावके हो गये हैं, विविध क्लेशोंसे आक्रान्त इन जीवोंको शुद्ध (दैवीशक्तिसम्पन्न) बनानेका सर्वश्रेष्ठ उपाय क्या है?॥ ६॥✎ 15601561
इह घोरे कलौ प्रायो जीवश्चासुरतां गतः।
क्लेशाक्रान्तस्य तस्यैव शोधने किं परायणम्॥ ६
इस घोर कलिकालमें जीव प्रायः आसुरी स्वभावके हो गये हैं, विविध क्लेशोंसे आक्रान्त इन जीवोंको शुद्ध (दैवीशक्तिसम्पन्न) बनानेका सर्वश्रेष्ठ उपाय क्या है?॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 33) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)