श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.51

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

इमौ तु शयितावत्र सुतौ मे क्लिश्यतः श्रमात्।

इदं स्थानं परित्यज्य विदेशं गम्यते मया॥ ५१

imau tu śayitāvatra sutau me kliśyataḥ śramāt|

idaṃ sthānaṃ parityajya videśaṃ gamyate mayā|| 51

अर्थ

किन्तु सामने पड़े हुए ये दोनों मेरे पुत्र थके-माँदे दुःखी हो रहे हैं। अब मैं यह स्थान छोड़कर अन्यत्र जाना चाहती हूँ॥ ५१॥

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