श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.39

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

वृद्धौ द्वौ पतितौ पार्श्वे निःश्‍वसन्तावचेतनौ।

शुश्रूषन्ती प्रबोधन्ती रुदती च तयोः पुरः॥ ३९

vṛddhau dvau patitau pārśve niḥśvasantāvacetanau|

śuśrūṣantī prabodhantī rudatī ca tayoḥ puraḥ|| 39

अर्थ

उसके पास दो वृद्ध पुरुष अचेत अवस्थामें पड़े जोर-जोरसे साँस ले रहे थे। वह तरुणी उनकी सेवा करती हुई कभी उन्हें चेत करानेका प्रयत्न करती और कभी उनके आगे रोने लगती थी॥ ३९॥✎ 1954

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1954 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दशों → दसों

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