॥ श्रीहरिः ॥
अत्र ते कीर्तयिष्यामि भक्तियुक्तं कथानकम्।
शुकेन मम यत्प्रोक्तं रहः शिष्यं विचार्य च॥ २४
atra te kīrtayiṣyāmi bhaktiyuktaṃ kathānakam|
śukena mama yatproktaṃ rahaḥ śiṣyaṃ vicārya ca|| 24
अर्थ
सूतजीने कहा—अब मैं तुम्हें वह भक्तिपूर्ण कथानक सुनाता हूँ, जो श्रीशुकदेवजीने मुझे अपना अनन्य शिष्य जानकर एकान्तमें सुनाया था॥ २४॥
अत्र ते कीर्तयिष्यामि भक्तियुक्तं कथानकम्।
शुकेन मम यत्प्रोक्तं रहः शिष्यं विचार्य च॥ २४
सूतजीने कहा—अब मैं तुम्हें वह भक्तिपूर्ण कथानक सुनाता हूँ, जो श्रीशुकदेवजीने मुझे अपना अनन्य शिष्य जानकर एकान्तमें सुनाया था॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 35) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/24/