मनकी शुद्धिके लिये इससे बढ़कर कोई साधन नहीं है। जब मनुष्यके जन्म-जन्मान्तरका पुण्य उदय होता है, तभी उसे इस भागवतशास्त्रकी प्राप्ति होती है॥ १२॥
एतस्मादपरं किंचिन्मनः शुद्ध्यै न विद्यते।
जन्मान्तरे भवेत्पुण्यं तदा भागवतं लभेत्॥ १२
मनकी शुद्धिके लिये इससे बढ़कर कोई साधन नहीं है। जब मनुष्यके जन्म-जन्मान्तरका पुण्य उदय होता है, तभी उसे इस भागवतशास्त्रकी प्राप्ति होती है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 34) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/12/