भगीरथका पुत्र था श्रुत, श्रुतका नाभ। यह नाभ पूर्वोक्त नाभसे भिन्न है। नाभका पुत्र था सिन्धुद्वीप और सिन्धुद्वीपका अयुतायु। अयुतायुके पुत्रका नाम था ऋतुपर्ण। वह नलका मित्र था। उसने नलको पासा फेंकनेकी विद्याका रहस्य बतलाया था और बदलेमें उससे अश्व-विद्या सीखी थी। ऋतुपर्णका पुत्र सर्वकाम हुआ॥ १६-१७॥
यह अर्थ श्लोक 16–17 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
श्रुतो भगीरथाज्जज्ञे तस्य नाभोऽपरोऽभवत्।
सिन्धुद्वीपस्ततस्तस्मादयुतायुस्ततोऽभवत्॥ १६
भगीरथका पुत्र था श्रुत, श्रुतका नाभ। यह नाभ पूर्वोक्त नाभसे भिन्न है। नाभका पुत्र था सिन्धुद्वीप और सिन्धुद्वीपका अयुतायु। अयुतायुके पुत्रका नाम था ऋतुपर्ण। वह नलका मित्र था। उसने नलको पासा फेंकनेकी विद्याका रहस्य बतलाया था और बदलेमें उससे अश्व-विद्या सीखी थी। ऋतुपर्णका पुत्र सर्वकाम हुआ॥ १६-१७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.9.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 47) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/9/16/