श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

राज्यमंशुमति न्यस्य निःस्पृहो मुक्तबन्धनः।

और्वोपदिष्टमार्गेण लेभे गतिमनुत्तमाम्॥ ३१

rājyamaṃśumati nyasya niḥspṛho muktabandhanaḥ|

aurvopadiṣṭamārgeṇa lebhe gatimanuttamām|| 31

अर्थ

तब राजा सगरने अंशुमान्को राज्यका भार सौंप दिया और वे स्वयं विषयोंसे निःस्पृह एवं बन्धनमुक्त हो गये। उन्होंने महर्षि और्वके बतलाये हुए मार्गसे परमपदकी प्राप्ति की॥ ३१॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां नवमस्कन्धे सगरोपाख्यानेऽष्टमोऽध्यायः॥ ८॥

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