तब राजा सगरने अंशुमान्को राज्यका भार सौंप दिया और वे स्वयं विषयोंसे निःस्पृह एवं बन्धनमुक्त हो गये। उन्होंने महर्षि और्वके बतलाये हुए मार्गसे परमपदकी प्राप्ति की॥ ३१॥
राज्यमंशुमति न्यस्य निःस्पृहो मुक्तबन्धनः।
और्वोपदिष्टमार्गेण लेभे गतिमनुत्तमाम्॥ ३१
तब राजा सगरने अंशुमान्को राज्यका भार सौंप दिया और वे स्वयं विषयोंसे निःस्पृह एवं बन्धनमुक्त हो गये। उन्होंने महर्षि और्वके बतलाये हुए मार्गसे परमपदकी प्राप्ति की॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.8.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 45) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/8/31/