श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.15

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

योऽसमंजस इत्युक्तः स केशिन्या नृपात्मजः।

तस्य पुत्रोंऽशुमान् नाम पितामहहिते रतः॥ १५

yo'samaṃjasa ityuktaḥ sa keśinyā nṛpātmajaḥ|

tasya putroṃ'śumān nāma pitāmahahite rataḥ|| 15

अर्थ

सगरकी दूसरी पत्‍नीका नाम था केशिनी। उसके गर्भसे उन्हें असमंजस नामका पुत्र हुआ था। असमंजसके पुत्रका नाम था अंशुमान्। वह अपने दादा सगरकी आज्ञाओंके पालन तथा उन्हींकी सेवामें लगा रहता॥ १५॥

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