श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.7.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

गन्धर्वानवधीत् तत्र वध्यान् वै विष्णुशक्तिधृक्३।

नागाल्लब्धवरः सर्पादभयं स्मरतामिदम्॥ ३

gandharvānavadhīt tatra vadhyān vai viṣṇuśaktidhṛk|

nāgāllabdhavaraḥ sarpādabhayaṃ smaratāmidam|| 3

अर्थ

वहाँ भगवान्‌की शक्तिसे सम्पन्‍न होकर पुरुकुत्सने वध करनेयोग्य गन्धर्वोंको मार डाला। इसपर नागराजने प्रसन्‍न होकर पुरुकुत्सको वर दिया कि जो इस प्रसंगका स्मरण करेगा, वह सर्पोंसे निर्भय हो जायगा॥ ३॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    क्तिभृत्।

    (मुद्रित पृष्ठ 38)

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