gandharvānavadhīt tatra vadhyān vai viṣṇuśaktidhṛk|
nāgāllabdhavaraḥ sarpādabhayaṃ smaratāmidam|| 3
अर्थ
वहाँ भगवान्की शक्तिसे सम्पन्न होकर पुरुकुत्सने वध करनेयोग्य गन्धर्वोंको मार डाला। इसपर नागराजने प्रसन्न होकर पुरुकुत्सको वर दिया कि जो इस प्रसंगका स्मरण करेगा, वह सर्पोंसे निर्भय हो जायगा॥ ३॥
गन्धर्वानवधीत् तत्र वध्यान् वै विष्णुशक्तिधृक्।
नागाल्लब्धवरः सर्पादभयं स्मरतामिदम्॥ ३
वहाँ भगवान्की शक्तिसे सम्पन्न होकर पुरुकुत्सने वध करनेयोग्य गन्धर्वोंको मार डाला। इसपर नागराजने प्रसन्न होकर पुरुकुत्सको वर दिया कि जो इस प्रसंगका स्मरण करेगा, वह सर्पोंसे निर्भय हो जायगा॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.7.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 38) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/7/3/