श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.58

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मरीचिप्रमुखाश्‍चान्ये सिद्धेशाः पारदर्शनाः।

विदाम न वयं सर्वे यन्मायां माययाऽऽवृताः॥ ५८

marīcipramukhāścānye siddheśāḥ pāradarśanāḥ|

vidāma na vayaṃ sarve yanmāyāṃ māyayā''vṛtāḥ|| 58

अर्थ

मैं, सनत्कुमार, नारद, भगवान् ब्रह्मा, कपिलदेव, अपान्तरतम, देवल, धर्म, आसुरि तथा मरीचि आदि दूसरे सर्वज्ञ सिद्धेश्‍वर—ये हम सभी भगवान्‌की मायाको नहीं जान सकते। क्योंकि हम उसी मायाके घेरेमें हैं॥ ५७-५८॥

यह अर्थ श्लोक 57–58 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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