श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.38

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मुहूर्तार्धावशिष्टायां द्वादश्यां पारणं प्रति।

चिन्तयामास धर्मज्ञो द्विजैस्तद्धर्मसंकटे॥ ३८

muhūrtārdhāvaśiṣṭāyāṃ dvādaśyāṃ pāraṇaṃ prati|

cintayāmāsa dharmajño dvijaistaddharmasaṃkaṭe|| 38

अर्थ

इधर द्वादशी केवल घड़ीभर शेष रह गयी थी। धर्मज्ञ अम्बरीषने धर्म-संकटमें पड़कर ब्राह्मणोंके साथ परामर्श किया॥ ३८॥

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