व्रतकी समाप्ति होनेपर कार्तिक महीनेमें उन्होंने तीन रातका उपवास किया और एक दिन यमुनाजीमें स्नान करके मधुवनमें भगवान् श्रीकृष्णकी पूजा की॥ ३०॥✎ 1633
व्रतान्ते कार्तिके मासि त्रिरात्रं समुपोषितः।
स्नातः कदाचित् कालिन्द्यां हरिं मधुवनेऽर्चयत्॥ ३०
व्रतकी समाप्ति होनेपर कार्तिक महीनेमें उन्होंने तीन रातका उपवास किया और एक दिन यमुनाजीमें स्नान करके मधुवनमें भगवान् श्रीकृष्णकी पूजा की॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 22) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)