श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.20

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

पादौ हरेः क्षेत्रपदानुसर्पणे

शिरो हृषीकेशपदाभिवन्दने।

कामं च दास्ये न तु कामकाम्यया

यथोत्तमश्‍लोकजनाश्रया रतिः॥ २०

pādau hareḥ kṣetrapadānusarpaṇe

śiro hṛṣīkeśapadābhivandane|

kāmaṃ ca dāsye na tu kāmakāmyayā

yathottamaślokajanāśrayā ratiḥ|| 20

अर्थ

अम्बरीषके पैर भगवान्‌के क्षेत्र आदिकी पैदल यात्रा करनेमें ही लगे रहते और वे सिरसे भगवान् श्रीकृष्णके चरणकमलोंकी वन्दना किया करते। राजा अम्बरीषने माला, चन्दन आदि भोग-सामग्रीको भगवान्‌की सेवामें समर्पित कर दिया था। भोगनेकी इच्छासे नहीं, बल्कि इसलिये कि इससे वह भगवत्प्रेम प्राप्त हो, जो पवित्रकीर्ति भगवान्‌के निज-जनोंमें ही निवास करता है॥ २०॥

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