उसने अपने भाइयोंसे पूछा—‘भाइयो! आपलोगोंने मुझे हिस्सेमें क्या दिया है?’ तब उन्होंने उत्तर दिया कि ‘हम तुम्हारे हिस्सेमें पिताजीको ही तुम्हें देते हैं।’ उसने अपने पितासे जाकर कहा—‘पिताजी! मेरे बड़े भाइयोंने हिस्सेमें मेरे लिये आपको ही दिया है।’ पिताने कहा—‘बेटा! तुम उनकी बात न मानो॥ २॥
भ्रातरोऽभाङ्क्त किं मह्यं भजाम पितरं तव।
त्वां ममार्यास्तताभाङ्क्षुर्मा पुत्रक तदादृथाः॥ २
उसने अपने भाइयोंसे पूछा—‘भाइयो! आपलोगोंने मुझे हिस्सेमें क्या दिया है?’ तब उन्होंने उत्तर दिया कि ‘हम तुम्हारे हिस्सेमें पिताजीको ही तुम्हें देते हैं।’ उसने अपने पितासे जाकर कहा—‘पिताजी! मेरे बड़े भाइयोंने हिस्सेमें मेरे लिये आपको ही दिया है।’ पिताने कहा—‘बेटा! तुम उनकी बात न मानो॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 18) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/2/