श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.13

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

नाभागादम्बरीषोऽभून्महाभागवतः कृती।

नास्पृशद् ब्रह्मशापोऽपि यं न प्रतिहतः क्‍वचित्॥ १३

nābhāgādambarīṣo'bhūnmahābhāgavataḥ kṛtī|

nāspṛśad brahmaśāpo'pi yaṃ na pratihataḥ kvacit|| 13

अर्थ

नाभागके पुत्र हुए अम्बरीष। वे भगवान्‌के बड़े प्रेमी एवं उदार धर्मात्मा थे। जो ब्रह्मशाप कभी कहीं रोका नहीं जा सका, वह भी अम्बरीषका स्पर्श न कर सका॥ १३॥

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