श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.22

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एवं ब्रुवाणं पितरं स्मयमाना शुचिस्मिता।

उवाच तात जामाता तवैष भृगुनन्दनः॥ २२

evaṃ bruvāṇaṃ pitaraṃ smayamānā śucismitā|

uvāca tāta jāmātā tavaiṣa bhṛgunandanaḥ|| 22

अर्थ

राजा शर्यातिके इस प्रकार कहनेपर पवित्र मुसकानवाली सुकन्याने मुसकराकर कहा—‘पिताजी! ये आपके जामाता स्वयं भृगुनन्दन महर्षि च्यवन ही हैं’॥ २२॥

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