उसकी एक कमललोचना कन्या थी। उसका नाम था सुकन्या। एक दिन राजा शर्याति अपनी कन्याके साथ वनमें घूमते-घूमते च्यवन ऋषिके आश्रमपर जा पहुँचे॥ २॥✎ 1631
सुकन्या नाम तस्यासीत् कन्या कमललोचना।
तया सार्धं वनगतो ह्यगमच्च्यवनाश्रमम्॥ २
उसकी एक कमललोचना कन्या थी। उसका नाम था सुकन्या। एक दिन राजा शर्याति अपनी कन्याके साथ वनमें घूमते-घूमते च्यवन ऋषिके आश्रमपर जा पहुँचे॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 15) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/3/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)