॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.7
सात्वतस्य सुताः सप्त महाभोजश्च मारिष।
भजमानस्य निम्लोचिः किंकिणो धृष्टिरेव च॥ ७
sātvatasya sutāḥ sapta mahābhojaśca māriṣa|
bhajamānasya nimlociḥ kiṃkiṇo dhṛṣṭireva ca|| 7
अर्थ
अनुसे पुरुहोत्र, पुरुहोत्रसे आयु और आयुसे सात्वतका जन्म हुआ। परीक्षित्! सात्वतके सात पुत्र हुए—भजमान, भजि, दिव्य, वृष्णि, देवावृध, अन्धक और महाभोज। भजमानकी दो पत्नियाँ थीं एकसे तीन पुत्र हुए—निम्लोचि, किंकिण और धृष्टि। दूसरी पत्नीसे भी तीन पुत्र हुए—शताजित्, सहस्राजित् और अयुताजित्॥ ६—८॥