॥ श्रीहरिः ॥
सुमित्रार्जुनपालादीञ्छमीकात्तु सुदामिनी।
कंकश्च कर्णिकायां वै ऋतधामजयावपि॥ ४४
sumitrārjunapālādīñchamīkāttu sudāminī|
kaṃkaśca karṇikāyāṃ vai ṛtadhāmajayāvapi|| 44
अर्थ
शमीककी पत्नी सुदामिनीने भी सुमित्र और अर्जुनपाल आदि कई बालक उत्पन्न किये। कंककी पत्नी कर्णिकाके गर्भसे दो पुत्र हुए—ऋतधाम और जय॥ ४४॥
सुमित्रार्जुनपालादीञ्छमीकात्तु सुदामिनी।
कंकश्च कर्णिकायां वै ऋतधामजयावपि॥ ४४
शमीककी पत्नी सुदामिनीने भी सुमित्र और अर्जुनपाल आदि कई बालक उत्पन्न किये। कंककी पत्नी कर्णिकाके गर्भसे दो पुत्र हुए—ऋतधाम और जय॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.24.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 116) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/24/44/