श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

येऽमृतत्वमनुप्राप्ता बभ्रोर्देवावृधादपि।

महाभोजोऽपि धर्मात्मा भोजा आसंस्तदन्वये॥ ११

ye'mṛtatvamanuprāptā babhrordevāvṛdhādapi|

mahābhojo'pi dharmātmā bhojā āsaṃstadanvaye|| 11

अर्थ

बभ्रु मनुष्योंमें श्रेष्ठ है और देवावृध देवताओंके समान है। इसका कारण यह है कि बभ्रु और देवावृधसे उपदेश लेकर चौदह हजार पैंसठ मनुष्य परम पदको प्राप्त कर चुके हैं।’ सात्वतके पुत्रोंमें महाभोज भी बड़ा धर्मात्मा था। उसीके वंशमें भोजवंशी यादव हुए॥ १०-११॥

यह अर्थ श्लोक 10–11 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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