॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.23.21
चत्वारः सूनवस्तत्र शतजित् प्रथमात्मजः।
महाहयो वेणुहयो हैहयश्चेति तत्सुताः॥ २१
catvāraḥ sūnavastatra śatajit prathamātmajaḥ|
mahāhayo veṇuhayo haihayaśceti tatsutāḥ|| 21
अर्थ
इस वंशमें स्वयं भगवान् परब्रह्म श्रीकृष्णने मनुष्यके-से रूपमें अवतार लिया था। यदुके चार पुत्र थे—सहस्रजित्, क्रोष्टा, नल और रिपु। सहस्रजित्से शतजित्का जन्म हुआ। शतजित्के तीन पुत्र थे—महाहय, वेणुहय और हैहय॥ २०-२१॥