श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.13

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

योऽसौ गंगातटे क्रीडन् मंजूषान्तर्गतं शिशुम्।

कुन्त्यापविद्धं कानीनमनपत्योऽकरोत् सुतम्॥ १३

yo'sau gaṃgātaṭe krīḍan maṃjūṣāntargataṃ śiśum|

kuntyāpaviddhaṃ kānīnamanapatyo'karot sutam|| 13

अर्थ

अधिरथको कोई सन्तान न थी। किसी दिन वह गंगातटपर क्रीडा कर रहा था कि देखा एक पिटारीमें नन्हा-सा शिशु बहा चला जा रहा है। वह बालक कर्ण था, जिसे कुन्तीने कन्यावस्थामें उत्पन्‍न होनेके कारण उस प्रकार बहा दिया था। अधिरथने उसीको अपना पुत्र बना लिया॥ १३॥

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