॥ श्रीहरिः ॥
बृहद्रथो बृहत्कर्मा बृहद्भानुश्च तत्सुताः।
आद्याद् बृहन्मनास्तस्माज्जयद्रथ उदाहृतः॥ ११
bṛhadratho bṛhatkarmā bṛhadbhānuśca tatsutāḥ|
ādyād bṛhanmanāstasmājjayadratha udāhṛtaḥ|| 11
अर्थ
पृथुलाक्षके बृहद्रथ, बृहत्कर्मा और बृहद्भानु—तीन पुत्र हुए। बृहद्रथका पुत्र हुआ बृहन्मना और बृहन्मनाका जयद्रथ॥ ११॥
बृहद्रथो बृहत्कर्मा बृहद्भानुश्च तत्सुताः।
आद्याद् बृहन्मनास्तस्माज्जयद्रथ उदाहृतः॥ ११
पृथुलाक्षके बृहद्रथ, बृहत्कर्मा और बृहद्भानु—तीन पुत्र हुए। बृहद्रथका पुत्र हुआ बृहन्मना और बृहन्मनाका जयद्रथ॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.23.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 109) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/23/11/