श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.43

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तिमेर्बृहद्रथस्तस्माच्छतानीकः सुदासजः।

शतानीकाद् दुर्दमनस्तस्यापत्यं बहीनरः॥ ४३

timerbṛhadrathastasmācchatānīkaḥ sudāsajaḥ|

śatānīkād durdamanastasyāpatyaṃ bahīnaraḥ|| 43

अर्थ

तिमिसे बृहद्रथ, बृहद्रथसे सुदास, सुदाससे शतानीक, शतानीकसे दुर्दमन, दुर्दमनसे वहीनर, वहीनरसे दण्डपाणि, दण्डपाणिसे निमि और निमिसे राजा क्षेमकका जन्म होगा। इस प्रकार मैंने तुम्हें ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनोंके उत्पत्तिस्थान सोमवंशका वर्णन सुनाया। बड़े-बड़े देवता और ऋषि इस वंशका सत्कार करते हैं॥ ४३-४४॥

यह अर्थ श्लोक 43–44 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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