श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.29

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

युधिष्ठिरात् प्रतिविन्ध्यः श्रुतसेनो वृकोदरात्।

अर्जुनाच्छ्रुतकीर्तिस्तु शतानीकस्तु नाकुलिः॥ २९

yudhiṣṭhirāt prativindhyaḥ śrutaseno vṛkodarāt|

arjunācchrutakīrtistu śatānīkastu nākuliḥ|| 29

अर्थ

इनमेंसे युधिष्ठिरके पुत्रका नाम था प्रतिविन्ध्य, भीमसेनका पुत्र था श्रुतसेन, अर्जुनका श्रुतकीर्ति, नकुलका शतानीक और सहदेवका श्रुतकर्मा। इनके सिवा युधिष्ठिरके पौरवी नामकी पत्‍नीसे देवक और भीमसेनके हिडिम्बासे घटोत्कच और कालीसे सर्वगत नामके पुत्र हुए। सहदेवके पर्वतकुमारी विजयासे सुहोत्र और नकुलके करेणुमतीसे निरमित्र हुआ। अर्जुनद्वारा नागकन्या उलूपीके गर्भसे इरावान् और मणिपूर नरेशकी कन्यासे बभ्रुवाहनका जन्म हुआ। बभ्रुवाहन अपने नानाका ही पुत्र माना गया। क्योंकि पहलेसे ही यह बात तय हो चुकी थी॥ २९—३२॥

यह अर्थ श्लोक 29–32 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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