इसलिये उसके छोटे भाई शन्तनु राजा हुए। पूर्वजन्ममें शन्तनुका नाम महाभिष था। इस जन्ममें भी वे अपने हाथोंसे जिसे छू देते थे, वह बूढ़ेसे जवान हो जाता था॥ १३॥
अभवच्छन्तनू राजा प्राङ्महाभिषसंज्ञितः।
यं यं कराभ्यां स्पृशति जीर्णं यौवनमेति सः॥ १३
इसलिये उसके छोटे भाई शन्तनु राजा हुए। पूर्वजन्ममें शन्तनुका नाम महाभिष था। इस जन्ममें भी वे अपने हाथोंसे जिसे छू देते थे, वह बूढ़ेसे जवान हो जाता था॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.22.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 105) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/22/13/