उतथ्यकी पत्नी ममता इस बातसे डर गयी कि कहीं मेरे पति मेरा त्याग न कर दें। इसलिये उसने बृहस्पतिजीके द्वारा होनेवाले लड़केको त्याग देना चाहा। उस समय देवताओंने गर्भस्थ शिशुके नामका निर्वचन करते हुए यह कहा॥ ३७॥✎ 1648
तं त्यक्तुकामां ममतां भर्तृत्यागविशंकिताम्।
नामनिर्वचनं तस्य श्लोकमेनं सुरा जगुः॥ ३७
उतथ्यकी पत्नी ममता इस बातसे डर गयी कि कहीं मेरे पति मेरा त्याग न कर दें। इसलिये उसने बृहस्पतिजीके द्वारा होनेवाले लड़केको त्याग देना चाहा। उस समय देवताओंने गर्भस्थ शिशुके नामका निर्वचन करते हुए यह कहा॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.20.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 99) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/20/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)