श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.35

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

तस्यैवं वितथे वंशे तदर्थं यजतः सुतम्।

मरुत्स्तोमेन मरुतो भरद्वाजमुपाददुः॥ ३५

tasyaivaṃ vitathe vaṃśe tadarthaṃ yajataḥ sutam|

marutstomena maruto bharadvājamupādaduḥ|| 35

अर्थ

इस प्रकार सम्राट् भरतका वंश वितथ अर्थात् विच्छिन्‍न होने लगा। तब उन्होंने सन्तानके लिये ‘मरुत्स्तोम’ नामका यज्ञ किया। इससे मरुद्गणोंने प्रसन्‍न होकर भरतको भरद्वाज नामका पुत्र दिया॥ ३५॥✎ 1648

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1648 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मरुद्-गणोंने → मरुद्गणोंने

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