श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.20.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

कण्वः कुमारस्य वने चक्रे समुचिताः क्रियाः।

बद‍्ध्वा मृगेन्द्रांस्तरसा क्रीडति स्म स बालकः॥ १८

kaṇvaḥ kumārasya vane cakre samucitāḥ kriyāḥ|

baddhvā mṛgendrāṃstarasā krīḍati sma sa bālakaḥ|| 18

अर्थ

महर्षि कण्वने वनमें ही राजकुमारके जातकर्म आदि संस्कार विधिपूर्वक सम्पन्‍न किये। वह बालक बचपनमें ही इतना बलवान् था कि बड़े-बड़े सिंहोंको बलपूर्वक बाँध लेता और उनसे खेला करता॥ १८॥

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