शत्रुदमन पृषध्रने यह समझा कि बाघ मर गया। परंतु रात बीतनेपर उसने देखा कि मैंने तो गायको ही मार डाला है, इससे उसे बड़ा दुःख हुआ॥ ८॥
मन्यमानो हतं व्याघ्रं पृषध्रः परवीरहा।
अद्राक्षीत् स्वहतां बभ्रुं व्युष्टायां निशि दुःखितः॥ ८
शत्रुदमन पृषध्रने यह समझा कि बाघ मर गया। परंतु रात बीतनेपर उसने देखा कि मैंने तो गायको ही मार डाला है, इससे उसे बड़ा दुःख हुआ॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 12) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/8/