॥ श्रीहरिः ॥
करूषान्मानवादासन् कारूषाः क्षत्रजातयः।
उत्तरापथगोप्तारो ब्रह्मण्या धर्मवत्सलाः॥ १६
karūṣānmānavādāsan kārūṣāḥ kṣatrajātayaḥ|
uttarāpathagoptāro brahmaṇyā dharmavatsalāḥ|| 16
अर्थ
मनुपुत्र करूषसे कारूष नामक क्षत्रिय उत्पन्न हुए। वे बड़े ही ब्राह्मणभक्त, धर्मप्रेमी एवं उत्तरापथके रक्षक थे॥ १६॥
करूषान्मानवादासन् कारूषाः क्षत्रजातयः।
उत्तरापथगोप्तारो ब्रह्मण्या धर्मवत्सलाः॥ १६
मनुपुत्र करूषसे कारूष नामक क्षत्रिय उत्पन्न हुए। वे बड़े ही ब्राह्मणभक्त, धर्मप्रेमी एवं उत्तरापथके रक्षक थे॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 13) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/2/16/