॥ श्रीहरिः ॥
भूमण्डलस्य सर्वस्य पूरुमर्हत्तमं विशाम्।
अभिषिच्याग्रजांस्तस्य वशे स्थाप्य वनं ययौ॥ २३
bhūmaṇḍalasya sarvasya pūrumarhattamaṃ viśām|
abhiṣicyāgrajāṃstasya vaśe sthāpya vanaṃ yayau|| 23
अर्थ
सारे भूमण्डलकी समस्त सम्पत्तियोंके योग्यतम पात्र पूरुको अपने राज्यपर अभिषिक्त करके तथा बड़े भाइयोंको उसके अधीन बनाकर वे वनमें चले गये॥ २३॥
भूमण्डलस्य सर्वस्य पूरुमर्हत्तमं विशाम्।
अभिषिच्याग्रजांस्तस्य वशे स्थाप्य वनं ययौ॥ २३
सारे भूमण्डलकी समस्त सम्पत्तियोंके योग्यतम पात्र पूरुको अपने राज्यपर अभिषिक्त करके तथा बड़े भाइयोंको उसके अधीन बनाकर वे वनमें चले गये॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.19.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 94) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/19/23/