श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

भूमण्डलस्य सर्वस्य पूरुमर्हत्तमं विशाम्।

अभिषिच्याग्रजांस्तस्य वशे स्थाप्य वनं ययौ॥ २३

bhūmaṇḍalasya sarvasya pūrumarhattamaṃ viśām|

abhiṣicyāgrajāṃstasya vaśe sthāpya vanaṃ yayau|| 23

अर्थ

सारे भूमण्डलकी समस्त सम्पत्तियोंके योग्यतम पात्र पूरुको अपने राज्यपर अभिषिक्त करके तथा बड़े भाइयोंको उसके अधीन बनाकर वे वनमें चले गये॥ २३॥

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