श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.19.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तथाहं कृपणः सुभ्रु भवत्याः प्रेमयन्त्रितः।

आत्मानं नाभिजानामि मोहितस्तव मायया॥ १२

tathāhaṃ kṛpaṇaḥ subhru bhavatyāḥ premayantritaḥ|

ātmānaṃ nābhijānāmi mohitastava māyayā|| 12

अर्थ

सुन्दरी! मेरी भी यही दशा है। तुम्हारे प्रेमपाशमें बँधकर मैं भी अत्यन्त दीन हो गया। तुम्हारी मायासे मोहित होकर मैं अपने-आपको भी भूल गया हूँ॥ १२॥

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