श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.8

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

उत्तस्थुस्ते कुशलिनो निद्रापाय इवांजसा।

पितुर्विद्वांस्तपोवीर्यं रामश्‍चक्रे सुहृद्वधम्॥ ८

uttasthuste kuśalino nidrāpāya ivāṃjasā|

piturvidvāṃstapovīryaṃ rāmaścakre suhṛdvadham|| 8

अर्थ

परशुरामजीके इस प्रकार कहते ही जैसे कोई सोकर उठे, सब-के-सब अनायास ही सकुशल उठ बैठे। परशुरामजीने अपने पिताजीका तपो-बल जानकर ही तो अपने सुहृदोंका वध किया था॥ ८॥

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