पितुर्विद्वांस्तपोवीर्यं रामश्चक्रे सुहृद्वधम्॥ ८
uttasthuste kuśalino nidrāpāya ivāṃjasā|
piturvidvāṃstapovīryaṃ rāmaścakre suhṛdvadham|| 8
अर्थ
परशुरामजीके इस प्रकार कहते ही जैसे कोई सोकर उठे, सब-के-सब अनायास ही सकुशल उठ बैठे। परशुरामजीने अपने पिताजीका तपो-बल जानकर ही तो अपने सुहृदोंका वध किया था॥ ८॥
उत्तस्थुस्ते कुशलिनो निद्रापाय इवांजसा।
पितुर्विद्वांस्तपोवीर्यं रामश्चक्रे सुहृद्वधम्॥ ८
परशुरामजीके इस प्रकार कहते ही जैसे कोई सोकर उठे, सब-के-सब अनायास ही सकुशल उठ बैठे। परशुरामजीने अपने पिताजीका तपो-बल जानकर ही तो अपने सुहृदोंका वध किया था॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 81) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/16/8/